महत्वपूर्ण स्थल
नोहर की स्थापना ही हिन्दू धर्म की उस शाखा से हुई जो चीर और सनातन है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो धार्मिकता इस क्षेत्र में कूट-कूट कर भरी हो। यहां प्रत्येक मोहल्ले में, मन्दिर और धर्मशाला आपको मिलेगी। यहाँ के कुछ महत्वपूर्ण स्थल इस प्रकार हैं:-
1. पाप धर्म की मोरी : –
2. अमरनाथ जी का मठ :-
3. श्री सूर्यभवन मन्दिर :-
4. श्री गौशाला :-
5. झूले लाल का मन्दिर :-
6. श्री सैन मन्दिर :-
यह मन्दिर सैन परिवार के द्वारा बनाया गया है जो काफी आकर्षक एवं दर्शनीय है।
7. श्री राधाकृष्ण मन्दिर :-
8. श्री श्यामजी का मन्दिर :-
यह मन्दिर वर्तमान में नोहर के जोहड़े के समीप स्थित है जो यहां के समस्त निवासियों के योगदान से बना है। इस मन्दिर में श्री खाटूजी के श्यामजी की मूर्ति आकर्षक रूप में स्थापित है। यह विशाल मन्दिर भी एक दर्शनीय स्थल है।
9. श्री करणी माता का मन्दिर :-
1. पाप धर्म की मोरी : –
जोगी आसन में प्रसिद्ध संत अमरनाथजी की समाधि है। इस समाधि पर गोल गुम्बद वाला 15 फीट ऊँचा और 12 फीट चैड़ा मठ बना है। इसी मठ के पीछे एक अन्य महात्मा की समाधि पर गुमट बना है। इन दोनों गुमटों के मध्य की दूरी पश्चिमी किनारे की तरफ 3 फुट है। यह संकरी होते पूर्वी किनारे पर 6 इंच ही रह जाती है, क्योंकि यह ऊपर से नीचे की ओर भी इस तरह तंग होती गयी है। इसलिये कोई भी व्यक्ति 3 फुट चौड़ाई वाले रास्ते से घुसकर दूसरी तरफ 6 इंच वाले रास्ते से निकल जाते हैं। इसके लिए लोगों की यह मान्यता है कि जो व्यक्ति पार कर जाता है वह धर्मात्मा है और पापी व्यक्ति इसमें फँस जाता है। वास्तव में यह मनुष्य के स्वास्थ्य आंकने की कसौटी है। छाती और पेट सुकुचाकर तथा जिसका हृदय मजबूत हो वह व्यक्ति इसे पार कर लेता है।
2. अमरनाथ जी का मठ :-
नोहर में पंचपीर – अमरनाथजी, रक्तनागीरीजी, सारगिणीजी, ओधड़ानाथजी एवं कालीजी की पूजा बड़े सम्मान से की जाती रही है। अमरनाथजी नोहर ग्राम के भोमिया माने जाते हैं। इन सभी के मठ ऐतिहासिक एवं दर्शनीय हैं। अमरनाथ जी के मठ जिनमें तीन अन्य मठ भी हैं, सबसे प्राचीन हैं।
3. श्री सूर्यभवन मन्दिर :-
नोहर का श्री सूर्यभवन मन्दिर इस समय पूरे जिले भर में उत्कृष्ठ एवं दर्शनीय मन्दिरों में एक है। मन्दिर काफी भव्य एवं विशाल है, जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं की अलग प्रकोष्ठ में स्थापित मूर्तियाँ बड़ी आकर्षक, दैदिप्तमान, ओज और आभापूर्ण हैं तथा आधुनिक कलाकृति के श्रेष्ठ नमूने हैं। मन्दिर के पश्चिमी ओर सत्संग भवन (गीता भवन) है जो 60 फुट लम्बा और 50 फुट चौड़ा है। इसमें भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित है तथा हिन्दू धर्म सम्बन्धित बड़े आकर्षक भितिचित्र एवं सुक्तियाँ लिखी है। इस भवन में प्रायः सत्संग, धर्मचर्चा (प्रवचन) आदि होते रहते हैं। इसके अतिरिक्त इस मन्दिर के अधीन काफी बड़ा बाग है जिसमें समयानुसार सब्जी, फल पेड़ पौधे लगते रहते हैं। संक्षेप में, यह मन्दिर अपने आप में एक उत्कर्ष मिसाल है।
4. श्री गौशाला :-
नोहर की गौशाला राजस्थान की सर्वश्रेष्ठ गौशाला के रूप में विख्यात है। जिसके अधीन लगभग 1000 से ज्यादा गायें है। यहाँ विभिन्न किस्म की उत्तम गायें भी हैं। छोटे एवं बड़े बच्चे रखने हेतु अलग प्रकोष्ठ है। इस गौशाला के लिए गोचर भूमि 3600 बीघा है। इस गौशाला की मुख्य आय चंदा एवं बाजार में निर्धारित शुल्क (टैक्स) के जरिये होती है। इस गौशाला की स्थापना वि.स. 1965 में हुई थी वह आज विशाल रूप में विकसित है। जो दाताओं एवं कर्मठ कार्यकर्ताओं की देन का परिणाम है। गोपाष्टमी का मेला भी हरवर्ष इसलिए लगता है। यह गौशाला एक शत वार्षिकी पूर्ण कर चुकी है।
5. झूले लाल का मन्दिर :-
इस मन्दिर का निर्माण यहाँ आकर बसे सिंधी बन्धुओं ने करवाया है। इसका गोल और विशाल गुम्बद दूर से ही चमकता दिखाई देता है। मन्दिर बड़ा भव्य, विशाल एवं आकर्षक है। मध्य में विशाल गुम्बद में झूले लाल की प्रतिमा स्थापित है और दोनों ओर के मन्दिरों में रामसीता और राधाकृष्ण की प्रतिमाएँ हैं।
6. श्री सैन मन्दिर :-
यह मन्दिर सैन परिवार के द्वारा बनाया गया है जो काफी आकर्षक एवं दर्शनीय है।
7. श्री राधाकृष्ण मन्दिर :-
सेठ श्री गौरीशंकर जी बिहानी द्वारा निर्मित यह मन्दिर नोहर की धानमण्ड़ी के एवं थिरानी चिकित्सालय के करीब विद्यमान है इसमें राधा एवं श्रीकृष्ण की बड़ी मनमोहक मूर्तियाँ काफी आकर्षक हैं। इस मन्दिर के चारों तरफ के कांच के दरवाजे शीशमहल की तरह लगते हैं। इस मन्दिर का दर्शन भी काफी लुभावना है।
8. श्री श्यामजी का मन्दिर :-
यह मन्दिर वर्तमान में नोहर के जोहड़े के समीप स्थित है जो यहां के समस्त निवासियों के योगदान से बना है। इस मन्दिर में श्री खाटूजी के श्यामजी की मूर्ति आकर्षक रूप में स्थापित है। यह विशाल मन्दिर भी एक दर्शनीय स्थल है।
9. श्री करणी माता का मन्दिर :-
वैसे छोटे रूप में तो श्री करणी माता की मूर्ति पूजा प्रायः पिछले 20 सालों से होती रही है मगर अब इसे विशाल रूप में बनवाया गया है। इसका उदघाटन जनवरी 2008 में हुआ है। इसका निर्माण यहाँ के राजपूतों ने मिलकर करवाया है। यहाँ पर सफेद चूहे भी काफी तादाद में रखे गये हैं जो कोई भी हाथों में ले सकता है ये चूहे काटते नहीं हैं। ये बिस्कुट बड़े प्रेम से खाते हैं। यह भी एक दर्शनीय स्थल है जो नोहर रेलवे स्टेशन के पास है।
इसके अलावा, नोहर के विकास में स्वर्गीय सेठ श्री गौरीशंकर बिहानी का विशेष योगदान रहा है। उनके द्वारा निर्मित बिहानी महिला शिल्प शिक्षालय, नर्बदा देवी बिहानी क्रीड़ास्थल, बिहानी धर्मशाला, बालकृष्ण बिहानी स्टेडियम, नर्बदा देवी बिहानी राजकीय महाविद्यालय, बिहानी मार्ग, घंटाघर आदि सभी विशेष रूप से उल्लेखनीय है।