धर्म और उत्सव
धर्म
प्रमुख उत्सव
नोहर में सर्वाधिक संख्या हिन्दू धर्मामलम्बियों की रही है। हिन्दू धर्म की तीन मुख्य धाराऐं वैष्णव, शैक और शक्ति हैं। जिनमें समय समय पर अनके सम्प्रदाय उपसम्प्रदाय बनते रहे हैं। प्राचीन काल में यहां जैन बौद्ध व सनातन धर्मावलम्बियों का धार्मिक त्रिवेणी संगम था। यहां के लोग अत्यन्त धर्म सहिष्णु रहे हैं। 10वीं शताब्दी में जैन विद्वान पुष्यदन्त नोहर आये थे। बीकानेर मण्डल का सबसे प्राचीन शिलालेख नोहर के जैन मन्दिर में मिलता है उसमें लिखा है कि वि.स. 1084 में इस मूर्ति की प्रतिष्ठा कराई गई नोहर मध्ये इसका अभिप्राय यह है कि नोहर में 11वीं शताब्दी से पहले जैन धर्म काफी लोकप्रिय था। शनैः शनैः बौद्धो की संख्या लुप्त हो गई मध्य युग में नाथ योगियों का बडा प्रभाव था। स्त्रियां भी तब जोगिन बन जाती थी। जोगी लोग मुद्रा, नाद कथा, आसन, खप्पर, झोली, विभूति बटुआ, यंत्र, मेखला व भस्म धारण करते थे। नाथ योगी दोनों कानो को बीच में चीर कर कुण्डल धारण करने पर योगी कनपटानाथ कहलाता है तो कान नहीं चिराते उन्हें ओघड कहते हैं। नोहर क्षेत्र में भी नाथ सम्प्रदाय का पर्याप्त प्रभाव रहा है।
नोहर के अमरनाथ जी के डेरे में सम्वत् 1135 कार्तिक बदी 2 बुधवार सितम्बर 26, 1078 ई. का एक शिला लेख है। यह शिलालेख यहां पर नाथ सम्प्रदाय का प्राचीनता सिद्ध करता है। यहाँ सर्वप्रथम बालनाथ जी ने प्रवेश किया था बालनाथजी अमरनाथ जी के चौथे गुरू थे। इस्लाम धर्म के प्रर्वतक हजरत मुहम्मद थे। इस धर्म के मानने वालों को मोटे रूप में मुसलमान कहा जाता है। नोहर में इस्लाम धर्म का प्रत्यक्ष प्रभाव सुल्तान फिरोज तुगलक 1351-88 के समय से दृष्टिगत होता है। यहां के नागरिकों ने प्रसिद्ध चौहान राजा गोगादेव से कन्धे से कन्धा मिलाकर मुस्लिम आक्रमणकारियों के दांत खट्टे किये थे। वर्तमान में यहाँ मुस्लिम धर्म के लोग पर्याप्त संख्या में रह रहे है।
प्रमुख उत्सव
यहाँ वैसे सभी धर्म के लोग निवास करते हैं जाहिर है सभी त्योंहार मनाये जाते हैं। यहाँ के स्थानीय हिन्दुओं के त्यौहार मुख्य रूप से गणगौर आखातीज, रक्षाबंधन, तीज, जन्माष्टमी, दशहरा, दीवाली, शिवरात्रि एवं होली है। अश्विनी महीने में रामलीला की बड़ी चहल-पहल रहती है जो दशहरे के दिन रावण, मेघनाद एवं कुंभकर्ण के पुतले जलाकर समाप्त हो जाती है। होली एवं दीपावली का त्यौहार विशेष रूप से मनाया जाता है। यहां के मुस्लिम समुदाय का त्यौहार ईद-उल-फितर एवं ईद-उल-जुहा मुख्य है।
नोहर के समीप गोगामेड़ी नामक स्थान पर गोगानवमी (भादवा सुदी नवमी) पर उतर भारत का सबसे बड़ा मेला लगता है। यह मेला गोगा नवमी से एक महीने पहले ही शुरू हो जाता है। गोगानवमी को इस क्षेत्र के लोग त्यौहार के रूप में मनाते हैं। गोगामेड़ी के मेले के अतिरिक्त गणगौर एवं तीज के मेले लगते हैं जिसकी शोभा दर्शनीय है।